Home

茜茜公主

Govinda संग काम नहीं करना चाहती थीं Madhuri Dixit, लगातार ठुकराया था तीन फिल्मों का ऑफर_我的网站

极速前进

A |     एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। गोविंदा और माधुरी दीक्षित (Madhuri Dixit) हिंदी सिनेमा के वो दो कलाकार हैं, जिनकी हुकूमत 90 के दशक में बॉक्स ऑफिस चला करती थी। इन दोनों को उस समय हिट मूवीज का गारंटी माना जाता था। हर फिल्ममेकर्स गोविंदा (Govinda) और माधुरी को अपनी-अपनी मूवीज में कास्ट करना चाहता था। ,लेकिन क्या आप जानते हैं माधुरी दीक्षित गोविंदा के साथ शुरुआत में काम नहीं करना चाहती थीं और उन्होंने एक के बाद एक उनकी तीन मूवीज के ऑफर को ठुकरा दिया था। इस मामले का खुलासा खुद मशहूर प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी ने हाल ही में एक मीडिया इंटरव्यू में किया है। ,निर्माता पहलाज निहलानी ने हाल ही में पिंकविला को दिए इंटरव्यू में माधुरी दीक्षित को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया है- मैं जब भी माधुरी के पास कोई फिल्म लेकर जाता था तो वह उसे रिजेक्ट कर देती थीं। मैं उनके पास गोविंदा की फिल्म इल्जाम लेकर गया, जिसको उन्होंने मना कर दिया। यही काम आग ही आग और पाप की दुनिया को लेकर किया और माधुरी ने उनका भी ऑफर ठुकारा दिया।,

फोटो क्रेडिट- एक्स
कमाल की बात ये रही कि गोविंदा के साथ मेरी ये तीनों मूवीज सुपरहिट रहीं और दूसरी तरफ माधुरी की फ्लॉप मूवीज का सिलसिला जारी था। मुझे लगता है कि रिक्कू राकेश नाथ ही माधुरी को ये सलाह देते थे कि गोविंदा संग काम न करो, क्योंकि वह न्यू कमर्स है। ये मैं इसलिए कह रहा हूं कि क्योंकि मैंने रिक्की को माधुरी को मनाने की जिम्मेदारी थी, जो वह नहीं कर पाए। ,
फोटो क्रेडिट- फेसबुक
माधुरी ने मेरी फिल्मों के लिए मना कर दिया था। फिर मैंने नीलम कोठारी को साइन किया और आलम ये रहा कि नीलम और गोविंदा की जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। इस तरह से इंडस्ट्री को एक नई सुपरहिट जोड़ी मिली। ,जब माधुरी दीक्षित को ये एहसास हुआ कि निर्माता पहलाज निहलानी की फिल्मों को मना करके वह गलती कर रही हैं, तब जाकर उन्होंने अपनी गलती सुधारी और फिर बाद में वह पहलाज की मूवी तेजाब में काम किया। इस मूवी से माधुरी का एक्टिंग करियर ट्रैक पर लौटा और वह स्टार बन गईं। इतना ही नहीं बाद में उन्होंने गोविंदा के साथ महासंग्राम, इज्जतदार और पाप का अंत जैसी फिल्मों में काम किया। ,यह भी पढ़ें- Aishwarya Rai नहीं, ये सुपरहिट एक्ट्रेस थीं 'हम दिल दे चुके सनम' के लिए पहली पसंद, विदेश में हुई थी शूटिंग यह भी पढ़ें- 'मैं पागल हो जाती हूं...' Govinda के मुंह से ये शब्द सुनकर खुशी से झूम उठती हैं Sunita Ahuja。    जागरण संवाददाता, आगरा। फर्जी बैनामों से कब्जा करने वाले गिरोह का सात महीने पहले पर्दाफाश हुआ था। गिरोह ने 700 करोड़ रुपये से अधिक की बेशकीमती जमीनों को फर्जी बैनामों की मदद से धोखाधड़ी करके कब्जा कराने का प्रयास किया था। जिल्द बही से असली बैनामे गायब करा दिए थे। उनकी जगह फर्जी बैनामे कर्मचारियों की मिलीभगत से जिल्द बही में लगवा दिए थे।,एसआइटी ने सदर तहसील के लेखागार से जांच के दायरे में आई आधा दर्जन से अधिक जिल्द बही को फोरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा था। लैब में इन फर्जी बैनामों की जांच शुरू हो गई है। विज्ञानियों द्वारा जिल्द बही की स्याही, हस्ताक्षर और पन्नों की जांच की जा रही है। लैब की रिपोर्ट जल्द ही एसआइटी को मिलने की उम्मीद है।,दैनिक जागरण द्वारा शहर की बेशकीमती जमीनों पर फर्जी बैनामों से कब्जा करने वाले गिरोह का इस वर्ष जनवरी में पर्दाफाश किया गया था। मामले में 21 जनवरी को शाहगंज थाने में प्रशासन की ओर से 11 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसमें प्रशांत शर्मा, अजय सिसौदिया, भानु रावत, प्रबल प्रताप चौहान, राजकुमार,बृजेश दुबे, सुमित अग्रवाल केंद्रीय अभिलेखागार के सेवानिवृत्त रिकार्ड कीपर देवदत्त शर्मा समेत 11 लोग नामजद हैं।,एसआइटी द्वारा अभिलेखागार से वह जिल्द अपने कब्जे में ली गई थीं,जिनसे असली बैनामा गायब किए गए। उक्त मुकदमे से संबंधित चार जिल्द बही को फोरेंसिक लैब जांच के लिए भेजा गया था। पांचवीं जिल्द बही सदर में पिछले वर्ष दर्ज मुकदमे से संबंधित है। डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि फर्जी बैनामों की जांच रिपोर्ट जल्द भेजने के लिए फोरेंसिक लैब को रिमाइंडर भेजा गया है।,यह भी पढ़ें- UP के इस शहर में बांग्लादेशी मतदाताओं की जांच शुरू, विधायक ने रक्षा मंत्री से की थी शिकायत पन्नों और स्याही की जांच से ऐसे खुलेगा राज पन्ना: जिल्द बही में दशकों पुराने पन्ने होते हैं। जिससे उनका रंग बदल जाता है। जिन असली पन्नों को हटाकर उनकी जगह फर्जी बैनामा या वसीयत लगाई गई है, उनका रंग समेत अन्य चीजों के आधार पर जांच की जाएगी।,स्याही: असली और फर्जी बैनामों की स्याही का रंग अलग होता है। असली बैनामे कई दशक पुराने होने के चलते उनकी स्याही पुरानी हो जाती है। जबकि नए बैनामे की स्याही का रंग पुरानी की अपेक्षा अधिक स्याह होता है। विज्ञानियों द्वारा स्याही के अंतर से बैनामे के असली या फर्जी होने की पुष्टि करेंगे।。

B |

Current article:http://da3.ninyakenhongnian.sbs/w45/7l2t.html

Published on:19:43:31


Copyright 茜茜公主 2020-2099 About us | recruitment information | contact us | Site map | Friendly links | Feedback | Site map